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Arabic and Persian Historical Books ! अरबी व् फारसी की ऐतिहासिक पुस्तकों से जुड़ी रोचक जानकारी

जानें अरबी व् फारसी की ऐतिहासिक पुस्तकों से जुड़ी रोचक जानकारी / Arabic and Persian Historical Books History in Hindi


Arabic and Persian Historical Books History in Hindi
Historical Books
भारत के इतिहास को जानने के लिए ऐतिहासिक ग्रंथ, पुस्तकें व जीवनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. आज के समय हम भारत के इतिहास के बारे में जितना भी पढ़ते हैं वह सभी इन्हीं ग्रंथों, पुस्तकों इत्यादि की ही देन है. आज से हजारों साल पहले लिखी गई ऐतिहासिक पुस्तकें हमें प्राचीन भारत के राजनितिक व् समाजिक इतिहास की याद दिलाती हैं.

इस लेख के द्वारा GyaniMaster आपको अरबी व् फारसी की 10 ऐतिहासिक पुस्तकों से संबंधित ज्ञान से भरपूर रोचक जानकारी (Arabic and Persian Historical Books History in Hindi) देने जा रहे हैं. यह लेख इतिहासिक अरबी व फारसी भाषा की पुस्तकों से संबंधित आपके ज्ञान को बढ़ाने में योगदान देगा

अरबी व् फारसी की 10 ऐतिहासिक पुस्तकों से संबंधित रोचक जानकारी - Arabic and Persian Historical Books History in Hindi

Arabic and Persian Historical Books History in Hindi
Arabic and Persian Historical Books History in Hindi

 तहकीकात ए हिंद (तहकिकाते हिन्द)


तहकिकाते हिन्द पुस्तक की रचना अलबरूनी ने अरबी भाषा में की थी.अलबरूनी का पूरा नाम अबु रेहान मुहम्मद बिन अहमद अल-बयरुनी था.अलबरूनी सुल्तान महमूद गजनवी के आक्रमणों के समय भारत आया था. यु तो अलबरूनी चिकित्सा विशेषक था बावजूद इसके वह एक मशहूर गणितज्ञ, भूगोलवेत्ता, कवि, रसायन वैज्ञानिक और दार्शनिक भी था.अलबरूनी ने अपने जीवन काल में कुल 146 क़िताबें लिखीं. जिस में  35 खगोलशास्त्र पर, 23 ज्योतिषशास्त्र की, 15 गणित की, 16 साहित्यिक तथा अन्य कई विषयों पर रचनाएँ की. तहकिकाते हिन्द में अलबरूनी ने भारत के खान पान, धर्म व त्यौहार आदि विषयों पर लिखा है. इस किताब से हमें 11 वी शताब्दी के आस पास के भारत को जानने में सहायता मिलती है.


ताज उल मुआसिर


ताज उल मुआसिर पुस्तक की रचना हसन निजामी ने की. इस पुस्तक को फारसी भाषा में लिखा गया था. इस पुस्तक से हमें 12 वीं शताब्दी के भारत को जानने और समझने में सहायता मिलती है. 12 वीं शताब्दी के सामाजिक इतिहास पर लिखी गई है यह किताब मोहम्मद गोरी से इल्तुतमिश के शासन काल तक की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक घटनाओं की जानकारी देती है. हसन निजामी सुल्तान इल्तुतमिश का प्रिय लेखक था व् इल्तुतमिश के द्वारा निजामी को दरबार में सरंक्षण प्राप्त था.
हसन निजामी द्वारा लिखी गई इस पुस्तक  को दिल्ली सल्तनत काल की पहली इतिहासिक पुस्तक माना जाता है.


तारीखे यामिनी 


तारीखे यामिनी की रचना रचनाकार अल - उत्वी ने की थी. तारीखे यामिनी पुस्तक को अरबी भाषा में लिखा गया था. इस पुस्तक के माद्यम से हमें महमूद गजनवी के आक्रमण के समय भारत की व्यवस्था, व् भारतीय समाज के बारे में जानकारी प्राप्त होती है.

तारीख ए फिरोजशाही


तारीख ए फिरोजशाही पुस्तक की रचना रचनाकार जियाउद्दीन बरनी ने की. यह पुस्तक फारसी भाषा में लिखी गई. इस पुस्तक के द्वारा हमें 14 वी शताब्दी के भारत को जानने और समझने में सहायता मिलती है. इस पुस्तक के द्वारा अलाउद्दीन खिलजी से लेकर तुगलक वंश से जुड़े विभिन्न विषयो पर चर्चा की गई है.तारीख़-ए-फिरोजशाही सल्तनत काल के तत्कालीन सामाज, संस्कृति, राजनीति तथा शासन व्यवस्था का प्रमाणिक एवं विश्वसनीय पुस्तक है.

 इस पुस्तक के अध्ययन से पता चलता है कि अलाउद्दीन खिलजी द्वारा चलाई बाजार नियंत्रण नीति व मोहम्मद तुगलक की हवाई योजना से आम जनता को क्या क्या परेशानियां हुई.


तारीख ए मुबारकशाही


इस पुस्तक की रचना याहिया बिन अहमद सरहिंदी ने की थी. इस पुस्तक को फ़ारसी भाषा में लिखा गया था. इस पुस्तक के द्वारा तुगलक वंश की रोचक जानकारी मिलती है

इस पुस्तक में तुगलकों के प्रशासनिक ज्ञान व् राजनितिक वर्चस्वो के लेखो को तारीख ए मुबारकशाही में संजोया गया है.


तुजुक ए बाबरी


तुजुक ए बाबरी को बाबरनामा के नाम से भी जाना जाता है इस पुस्तक की रचना  बाबर ने स्वयं की थी. बाबर ने इस पुस्तक को तुर्की भाषा में लिखा था. बाद के समय में बाबर के पोते अकबर ने 1583 ई. में अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना द्वारा 'तुज़्क-ए-बाबरी' का फ़ारसी में अनुवाद करवाया. इस पुस्तक में 16 वी शताब्दी के भारत का सम्पूर्ण उल्लेख देखने को मिलता है. इस पुस्तक के द्वारा 1504 से 1529 ई. तक की राजनीतिक एवं प्राकृतिक स्थिति का भी वर्णन मिलता है.
पुस्तक में लिखी कुछ रोचक जानकारियों पर प्रकाश डाले तो भारत के लोगों का जीवन, रहन-सहन, स्वभाव, भूमि, जलवायु, प्राकृतिक दृश्य, भारत की नदियाँ, पशु-पक्षी, भवन निर्माण कला और उद्योग धंधे इत्यादि कि सम्पूर्ण जानकारी इस पुस्तक में दी गई है.
बाबर ने बाबरनामा में लिखा है कि- "हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक विशाल देश है. इसमें सोने और चाँदी का विशाल भंडार है. यहाँ कि जलवायु भी अत्यधिक प्रभावशाली है.

हुमायूँनामा


हुमायूँनामा की रचना गुलबदन बेगम ने की थी. गुलबदन बेगम बाबर की बेटी व्  हुमायूं की सौतेली बहन थी. हुमायूँनामा को गुलबदन बेगम के द्वारा फारसी भाषा में लिखा गया था. इस पुस्तक के द्वारा हुमायूं की जीवनी का उल्लेख मिलता है. इस पुस्तक कि कुछ लेखो पर प्रकाश डाले तो हुमायूं एक विन्रम स्वभाव का राजा था व् वह अपने राज्य कि खुशहाली के लिए निरंतर प्रयासरत था. इस पुस्तक में बाबर से लेकर हुमायूँ तक के शासनकाल कि समस्त घटनाओ का उल्लेख मिलता है.
इस पुस्तक में कहाँ गया है हुमायूँ कि मृत्यु सीढ़ियों से गिरने के कारण हुई थी



तारीख ए शेरशाही


तारीख ए शेरशाही पुस्तक की रचना अब्बास खा ने की थी. इस पुस्तक को फारसी भाषा में लिखा गया था. यह पुस्तक शेरशाह के समय के इतिहासिक भारत की जानकारी देती है.
शेरशाह के समय भारत की सामाजिक, राजनीतिक, जलवायु इत्यादि लेखों का इस पुस्तक में वर्णन किया गया है.


आइन ए अकबरी


आइन ए अकबरी पुस्तक को अकबरनामा के नाम से भी जाना जाता है. इस पुस्तक कि रचना अबुल फजल ने कि थी. अबुल फजल राजा अकबर के समय उनके दरबारी इतिहासकार हुआ करते थे. अकबरनामा का शाब्दिक अर्थ है 'अकबर की कहानी'

अकबरनामा को अबुल फजल द्वारा फ़ारसी भाषा में लिखा गया था. इस पुस्तक के द्वारा अकबर के समय में हुई राजनितिक घटनाओ, समाजिक घटनाओ इत्यादि की सम्पूर्ण जानकारी देखने को मिलती है.

इस पुस्तक की कुछ विशेष लेखो पर प्रकाश डाले तो यह जाति-व्यवस्था, अकबर के समय के खान पान, रहन सहन, राज्य की समृद्धि, धर्म  इत्यादि इतिहास की जानकारी देती है.

तुजुक ए जहाँगीरी 


तुजुक ए जहाँगीरी को स्वयं जहांगीर ने लिखा था.इस पुस्तक को फारसी भाषा में लिखा गया था.तुजुक ए जहाँगीरी में राजा जहाँगीर की सम्पूर्ण जीवनी पढ़ने को मिलती है.

जहाँगीर को सलीम के नाम से भी जाना जाता था. सलीम राजा अकबर का बेटा था. अकबर की मृत्यु के पश्चात सलीम को मुग़ल राजा बनाया गया था और वह नुरुद्दीन मोहम्मद जहांगीर के उपनाम से मुगल बादशाह बना.

इस पुस्तक में जहाँगीर के समय भारत की राजनितिक व् समाजिक इतिहास को संजोया गया है.



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